सरकारी शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों की बैठक, 13 अप्रैल को विशाल मार्च का ऐलान
सरकारी शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों की बैठक, 13 अप्रैल को विशाल मार्च का ऐलान
AIJTF के बैनर तले सुल्तानपुर में संगठन का गठन, कई शिक्षकों को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी
रिपोर्ट: राम प्रसाद मिश्र
सुल्तानपुर। आर्य प्रयास न्यूज नेटवर्क। सरकारी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में बुधवार को जिले में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ उत्तर प्रदेश (AIJTF) के तत्वावधान में एक निजी रेस्टोरेंट में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में सर्वसम्मति से AIJTF सुल्तानपुर इकाई के गठन के साथ संयोजक मंडल का चयन किया गया। इसमें अटेवा के जिला अध्यक्ष अशोक सिंह गौरा, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रणधीर सिंह, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह, टीएससीटी के जिलाध्यक्ष अरुण, महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष गायत्री सिंह तथा माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के जिलाध्यक्ष सुभाष यादव को संयुक्त रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई।
सह संयोजक मंडल में मो. हसीब, रमेश कुमार, सत्यप्रिय पांडेय, वैभव सिंह और सीमा सिंह को जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा संगठन संचालन के लिए जनार्दन राय को सचिव, जगन्नाथ रावत को सह सचिव, पिंकल प्रकाश तिवारी को कोषाध्यक्ष, मनोज दूबे को मीडिया प्रभारी, अखिलेश मिश्रा को सोशल मीडिया प्रभारी, सुशांत को आईटी सेल प्रभारी, सुरेंद्र कुमार मौर्य को प्रवक्ता, बृजेश द्विवेदी को विधिक सलाहकार और शुचिता सिंह को प्रचार मंत्री बनाया गया।
बैठक में आगामी आंदोलन की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। निर्णय लिया गया कि टीईटी अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल 2026 को जिले में एक विशाल पैदल मार्च निकाला जाएगा। यह मार्च शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरेगा, जिसमें हजारों शिक्षकों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।
बैठक के आयोजक अशोक सिंह गौरा ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आरटीई एक्ट 2009 के तहत 23 अगस्त 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने उस समय राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा निर्धारित सभी योग्यताएं पूरी की थीं। ऐसे में 20-25 वर्षों की सेवा के बाद उन्हें पुनः परीक्षा देने के लिए बाध्य करना तर्कसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संगठन पूरी मजबूती के साथ संघर्ष करेगा और आगामी मार्च इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

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